देश में तेजी से बढ़ रही एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को लेकर अब केमिस्ट संगठन ने गंभीर चिंता जताई है।
ऑल इंडिया ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स यानी AIOCD ने अवैध रूप से संचालित ई-फार्मेसियों पर सीधा आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
संगठन का कहना है कि बिना डॉक्टर के वैध पर्चे के ऑनलाइन बिक रही एंटीबायोटिक्स देश के लिए बड़ा स्वास्थ्य संकट बनती जा रही हैं।
AIOCD ने प्रधानमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा है कि अवैध ई-फार्मेसियां ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट का खुला उल्लंघन कर रही हैं।
बिना डॉक्टर की सलाह और बिना वैध पर्चे के एंटीबायोटिक्स की ऑनलाइन बिक्री से एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस यानी AMR तेजी से बढ़ रहा है।
संगठन ने प्रधानमंत्री के हालिया मन की बात कार्यक्रम का हवाला देते हुए कहा कि ICMR की रिपोर्ट पहले ही चेतावनी दे चुकी है कि निमोनिया और यूरिन इन्फेक्शन जैसी बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली सामान्य दवाएं भी अब असरहीन होती जा रही हैं।
AIOCD का आरोप है कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म टेली-मेडिसिन नियमों का दुरुपयोग कर फर्जी या औपचारिक ऑनलाइन परामर्श के जरिए दवाएं बेच रहे हैं।
जबकि दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही ई-फार्मेसियों को अवैध घोषित कर चुका है, इसके बावजूद इन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो इलाज असफल होने के मामले बढ़ेंगे, स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव पड़ेगा और आम नागरिकों की जान खतरे में पड़ सकती है।
AIOCD ने सरकार से मांग की है कि सभी अवैध ई-फार्मेसियों को तुरंत बंद किया जाए और बिना वैध डॉक्टर के पर्चे के ऑनलाइन दवाओं की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।
संगठन ने दोहराया है कि एंटीबायोटिक्स का उपयोग केवल चिकित्सक की सलाह पर ही किया जाना चाहिए।
AIOCD का स्पष्ट संदेश है —
“स्वस्थ भारत – सुरक्षित भारत”


