पवई मध्य प्रदेश : नम आंखों से दी गई बप्पा को विदाई
मुख्य आकर्षण का केंद्र साइकिल पर विराजमान गणेश प्रतिमा रही
अगले बरस तू फिर से आ के जयकारों के साथ हुआ गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन
देश प्रदेश सहित जिले भर में गणेश चतुर्थी से शुरू हुए दस दिवसीय गणेश उत्सव का शनिवार को अनंत चतुर्दशी पर गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ समापन हो गया। सुबह से ही पवई नगर सहित क्षेत्र भर में गणेश पंडालों,प्रतिष्ठानों और लोगों के घरों में स्थापित गणेश प्रतिमाओं का विधि विधान मंत्रोच्चारण हवन पूजन और भंडारे के बाद आसपास स्थित नदी तालाबों में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। पवई नगर में भी नगर से बहने वाली पवित्र पतने नदी में प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं की आंखें नम दिखाई दी साथ ही गणपति बप्पा मोरया अगले बरस तू फिर से आ के जयकारों के साथ उन्हें विदाई दी गई। लोग ढोल नगाड़ों की धुन पर नाचते, एक दूसरे को रंग गुलाल लगाते दिखाई दिए। गणेश प्रतिमाओं में सबसे आकर्षक का केंद्र साइकिल पर विराजमान गणेश प्रतिमा थी। इस दौरान स्थानीय प्रशासन,नगरीय प्रशासन के मुखिया बसंत दहायत,थाना प्रभारी त्रिवेंद्र त्रिवेदी के साथ पुलिस बल सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मुस्तैद रहा। थाना प्रभारी ने बताया कि 50 प्रतिशत से ज्यादा प्रतिमाएं विसर्जित हो चुकी हैं,बड़ी प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए शासन प्रशासन के द्वारा क्रेन की व्यवस्था की गई है। लगभग दस बजे तक सारी मूर्ति विसर्जन की संभावना है। नदी के किनारे कोस्ट गार्ड की भी तैनाती की गई ताकि किसी भी अप्रिय घटना से निपटा जा सके। बता दें कि भगवान गणेश माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र हैं और रिद्धि सिद्धि सुख संपदा समृद्धि देने वाले और देवताओं में प्रथम पूज्य हैं उनकी पूजा आराधना करने से लोगों के सारे दुख दर्द दूर होते हैं और घरों में सुख समृद्धि आती है गणेश उत्सव के का प्रारंभ 1893 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के द्वारा की गई थी इसका उद्देश्य देश में एक जड़ता लाने और राष्ट्रवादी विचारों को बढ़ावा देना था पुरानी कथाओं के अनुसार गणेश जी लगातार 10 दिनों तक महाभारत ग्रंथ लिखते रहे जिस कारण उनके शरीर का तापमान बढ़ गया शरीर तुरंत अपने लगा था 10 दिनों के बाद गणेश जी के शरीर के ताप को संतुलित करने के लिए उनसे सरोवर में स्नान करने की विनती की गई तभी से अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन किया जाता है।


