विदिशा में सामने आए कथित धर्मांतरण के मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। सिविल लाइन थाना क्षेत्र में आरक्षित वर्ग की महिलाओं और पुरुषों को भोजन और धार्मिक गतिविधियों की आड़ में ईसाई धर्म से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल कराने के मामले की पुलिस जांच कर रही है। इसी बीच शुक्रवार दोपहर विदिशा पहुंचे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धर्मांतरण कराने या उसमें शामिल लोगों के खिलाफ सरकार के स्पष्ट और सख्त निर्देश हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन कर दूसरे धर्म में जाता है और इसके बावजूद आरक्षण का लाभ ले रहा है, तो उसका आरक्षण तत्काल समाप्त किया जाएगा। यह प्रावधान कानून में पहले से मौजूद है।
उन्होंने इस पूरे प्रकरण को गंभीर बताते हुए जिला प्रशासन और पुलिस को नोटिस जारी कर निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आयोग का कहना है कि किसी भी तरह का प्रलोभन देकर या दबाव बनाकर कराया गया धर्म परिवर्तन मानवाधिकारों का उल्लंघन है।


