सिरोंज के ख़त्म होते दरी उद्योग में नाबार्ड की मदद से जागी उम्मीद की किरण फिर से चालू हुए बंद पड़े हेंडलूम
सिरोंज की दरी पूरे प्रदेश और देश में है मशहूर
सिरोंज में सैकड़ो सालों से दरी बनाई जाती रही है , यह दरी अपनी बढ़िया क्वालिटी के कारण पूरे देश में प्रसिद्ध रही है l लेकिन कुछ साल से दरी उद्योग ख़त्म हो गया l मध्यप्रदेश राज्य हाथकरघा बुनकर संघ खत्म हो गया, यही दरी को सिरोंज के बुनकरों से खरीदकर पूरे देश में सप्लाई करता था l कोरोना काल में तो हेंडलूम पर ताले लग गये और इनके कारखाने कबाड़ में तब्दील हो गए l इस काम से जुड़े 120 परिवारों पर आजीविका चलाने का संकट आ गया l सिरोंज विधायक उमाकांत शर्मा ने अपने स्तर से काफ़ी प्रयास किये, सरकार को विजन डॉक्यूमेंट देकर दारी उद्योग को बचाने की मांग की l जिसके बाद नाबार्ड ने इसकी सुध ली और 2024 अगस्त में लुम्स की रिपेरिंग करवाई, शेड रिपेयर करवाया, 60 महिलाओं को आधुनिक ट्रेनिंग दिलवाई और दरी निर्माण का काम फिर से चालू करवाया lनाबार्ड ने न सिर्फ काम चालू करवाया, बल्कि इनको मार्किट भी उपलब्ध करवाया l इंदौर, भोपाल के मेलों में इनको फ्री में स्टाल उपलब्ध करवाये जिससे यह अपना सामान बेच संके l आगामी समय में नाबार्ड जम्मू कश्मीर में भी इनको लेकर जा रहा है ताकि इनकी बनाई सामग्री को लोग देख व खरीद सके सिरोंज के लूम पर बनाई गई दरी, बेडशीट, टॉवेल, डोर मेट 100% कॉटन से बना है और उपयोग में बढ़िया है, जबकि बाजार में बिक रहे अन्य सामान कॉटन मिक्स पोलिस्टर का होता है l इनकी कीमत भी ज्यादा नहीं रहती,इसलिए उम्मीद है कि सिरोंज का हेंडलूम एक बार फिर से चल पड़ेगा और ख़त्म होती कला बची रहेगी


